शायर हूँ मैं,
मगर कायर हूँ मैं.....
दीवारों से बतियाता हूँ,
अपनी दास्तान सुनाता हूँ.
ग़म का आशियाना,
बन चुका है man .
साथ न छोड़ता
है यह सूनापन...
दिल में है जस्बात ,
और आँखों में नमी...
है क्यूँ फिर mujh में
हिम्मत की कमी...
डरता हूँ मैं!
कर न सकता उसे मैं हासिल,
बन गया हूँ मैं ,
अपने अरमानों का कातिल .....
शायर हूँ मैं,
मगर कायर हूँ मैं!!!
-- मेरी कहानी ,मेरी ज़ुबानी
उम्मीद है आपको पसंद आई होगी...
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